जानिए तरबूज की किस्में और इसकी कृषि-मूल्य श्रृंखला

जानिए तरबूज और इसकी कृषि-मूल्य श्रृंखला जानिए तरबूज और इसकी कृषि-मूल्य श्रृंखला

तरबूज़, तरबुज, तोर्मुज, इंद्रक, एरिपुत्चा, कल्लंगादिबल्ली – भारत के इस पसंदीदा गर्मियों के फल को कई नामों से जाना जाता है। तरबूज न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि गर्मियों के दौरान प्यास बुझाने के लिए भी काफी अच्छे होते हैं। तरबूज पोषण का एक पावरहाउस है और इनके अंदर 92% पानी मौजूद होता है। इसलिए इसे अंग्रेजी में ‘वॉटरमेलन’ के नाम से जाना जाता है। भारत हर साल लगभग 427,105 टन तरबूज का उत्पादन करता है और दुनिया में अभी 25वें स्थान पर है। इस ब्लॉग में हम आपको तरबूज की खेती और इसकी कृषि-मूल्य श्रृंखला, भारत में उगाई जाने वाली तरबूज की किस्में, तरबूज के मंडी रेट और बहुत कुछ के बारे में बताएँगे।

तरबूज फल है या सब्जी?

टमाटर की तरह तरबूज भी अपनी सही पहचान का मोहताज है। कुछ लोगों के लिए यह एक सब्जी है तो कुछ के लिए यह एक फल है। हालांकि, यह फल है या सब्जी यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप यह सवाल किस्से पूछ रहे हैं। एक वनस्पतिशास्त्री से पूछें तो उसके लिए यह एक फल है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह पौधे के अंडाशय से उगता है और फिर बीज का रूप लेता है। वहीं अगर आप ओक्लाहोमा में किसी से बात करेंगे तो वह इसे सब्जी कहेंगे। साल 2007 में संयुक्त राज्य अमेरिका के इस राज्य ने तरबूज को अपनी आधिकारिक सब्जी घोषित कर दिया है। उनका मानना है कि तरबूज खीरे के परिवार का एक सदस्य है जिसे कुकुर्बिटासी के नाम से भी जाना जाता है।

Interesting facts about watermelon and watermelon cultivation
तरबूज के बारे में रोचक तथ्य

भारत में तरबूज उत्पादक राज्य

तरबूज को उगाने के लिए गर्म जलवायु की जरूरत होती है। ठंडे तापमान वाले क्षेत्रों में इसे नहीं उगाया जा सकता है क्योंकि वहां इसका फल मुरझा सकता है और बेल मर सकती है। भारत में शीर्ष तरबूज उत्पादक राज्यों में उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और उड़ीसा शामिल हैं। तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य तो पूरे साल तरबूज की खेती (watermelon cultivation) करते हैं। नीचे कुल उत्पादन मात्रा और शेयर प्रतिशत के आधार पर तरबूज उत्पादक राज्यों की एक सूची बनाई गई है।

Top 10 watermelon producing states in India
भारत में शीर्ष 10 तरबूज उत्पादक राज्य

तरबूज उगाने के लिए आदर्श परिस्थितियाँ

जलवायु:

तरबूज एक गर्म मौसम की फसल है। इसके लिए पर्याप्त मात्रा में धूप और गर्म मौसम की जरूरत होती है। थोड़ी सी ठंड भी इस पौधे के लिए बुरी होती है। तरबूज के पौधे के बीज अंकुरण और उसके बढ़ने के लिए आदर्श तापमान 24-27⁰C है।

मौसम:

तरबूज के बढ़ने के लिए कम से कम तीन धूप वाले महीनों की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि उत्तर भारतीय राज्य इसे फ़रवरी से मार्च और दक्षिण भारतीय राज्य इसे पूरे साल उगा सकते हैं।

मिट्टी:

तरबूज के लिए रेतीली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है। इस मिट्टी में पानी रुकता नहीं है और उसकी निकासी आसानी से हो जाती है। हालांकि, तरबूज को काली मिट्टी और रेतीली मिट्टी में भी अच्छी तरह से उगाया जा सकता है। हालांकि, ऐसी मिट्टी में जैविक सामग्री की मात्रा अच्छी होनी चाहिए तभी तरबूज उसमें उग पाएगा। साथ ही मिट्टी का पीएच 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए।

तरबूज कृषि-मूल्य श्रृंखला

तरबूज की खेती (Watermelon cultivation) एकल फसल की तरह या अंतरफसल की तरह की जा सकती है। सबसे पहले, यह तय करना जरूरी है कि आप किस उगाने की विधि का उपयोग करने जा रहे हैं। साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि उस विशेष क्षेत्र में तरबूज की कौन सी किस्म अच्छी तरह से उग पाएगी। आइए जानें कि तरबूज उगाने के विभिन्न चरणों में क्या होता है? आगे बढ़ने से पहले आइए भारत में उगाए जाने वाले कुछ सामान्य प्रकार के तरबूज (watermelon varieties) के बारे में जानते हैं।

Top watermelon varieties grown in India
भारत में उगाई जाने वाली तरबूज की शीर्ष किस्में

फसल काटने से पहले की अवस्था

पूर्व-कटाई चरण में बीज बोने और सिंचाई से लेकर फसल बदलने और पौधों की बीमारियों को नियंत्रित करने तक सब कुछ शामिल है।

भूमि की तैयारी और बुवाई

तरबूज की खेती के लिए मिट्टी को भुरभुरा और उपयुक्त बनाने की जरूरत होती है। इसके लिए भूमि की जुताई की जाती है। आमतौर पर तरबूज के बीजों को सीधे खेत में बोया जाता है। हालांकि, उन्हें ठंढ से बचाने के लिए कभी-कभी नर्सरी और ग्रीनहाउस में भी बोया जाता है। बाद में उन्हें खेतों में वापस बो दिया जाता है। बीजों को ऊपरी मिट्टी से लगभग 2-3 सेमी की गहराई पर बोया जाता है। पौधों और पंक्तियों के बीच की दूरी चुनी गई बुवाई विधि पर निर्भर करती है।

Sowing methods of watermelon
तरबूज की बुवाई की विधि

सिंचाई

तरबूज की क्यारियों को बुवाई से 2 दिन पहले और बुवाई के 5 दिन बाद सिंचित की जरूरत होती है। जब पौधा बढ़ने लगता है तो उसकी साप्ताहिक सिंचाई की जाती है। सिंचाई के समय पानी के अत्यधिक दबाव के कारण फल फटने का खतरा रहता है। सिंचाई को पौधे की जड़ों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए। इसकी लताओं या किसी और हिस्से को पानी देने से फूल, फल और पौधे पूरी तरह से मुरझा सकते हैं। इसकी सिंचाई केवल दिन के समय करने की सलाह दी जाती है। इसे शाम या रात में करने से फसल में पर्ण रोग विकसित हो सकता है।

फसल चक्र (crop rotation)

तरबूज को अलग-अलग तरह की बीमारियों से बचाने के लिए उन्हें 3 साल तक अलग-अलग मिट्टी पर उगाया जाता है। जब तरबूज के चक्र की बारी आती है तो उन्हें आमतौर पर धान या सब्जियों जैसे मिर्च, टमाटर आदि के साथ बदला जाता है।

खरपतवार नियंत्रण

तरबूज उगाने के शुरुआती चरणों में ही निराई की जरूरत होती है। यह एक बेल है, इसलिए शाकनाशी का इस्तेमाल सावधानी से किया जाना चाहिए क्योंकि यह पौधों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है। एक बार जब बेल फैलने लगती है, तो निराई से बचा जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि बेलें खरपतवारों की देखभाल करती हैं। महीने में एक बार तरबूज की निराई करने की सलाह दी जाती है।

रोग और कीट नियंत्रण

तरबूज की फसल को अलग-अलग चरणों में बड़ी संख्या में रोग और कीट प्रभावित करते हैं। इनमें एफिड्स, एन्थ्रेक्नोज, थ्रिप्स, फफूंदी, विल्ट आदि शामिल हैं। तरबूज में कीटों और बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए कुछ उपाय करने की आवश्यकता होती है। जैसे:

  • नियमित रूप से फफूंद नाशक का प्रयोग करें।
  • जांच करें कि क्या तरबूज रोपाई के दौरान भी बीमारियों से मुक्त हैं।
  • मिट्टी में पर्याप्त पानी डालें और पारंपरिक सिंचाई के बजाय ड्रिप सिंचाई को अपनाएं।
  • सुनिश्चित करें कि फसल में पर्याप्त वायु संचार हो।
  • नमी के स्तर पर नजर रखें।
  • लगातार मैदान की निगरानी करें।

कटाई

तरबूज को कटाई के लिए तब तैयार माना जाता है जब तने के पास की टहनियाँ सूखने लगती हैं। उनका सफेद भाग पीला हो जाता है और जब उन्हें थपथपाया जाता है, तो थरथराहट की आवाज आती है। बुवाई के 95-120 दिनों बाद तरबूज की कटाई की जा सकती है। इस दौरान पके फलों के तने को चाकू की मदद से काटा जाता है।

कटाई के बाद का चरण

इस चरण में ग्रेडिंग से लेकर भंडारण और परिवहन तक की गतिविधियों को पूरा किया जाता है।

ग्रेडिंग

स्थानीय बाजारों के लिए तरबूजों की ग्रेडिंग उनके आकार के अनुसार की जाती है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि सभी तरबूज देखने में एक समान हो। उनकी सतह चमकदार होनी चाहिए और यह निशान, परिवहन के दौरान लगी चोट और अन्य दोषों के बिना होने चाहिए।

पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन

कम समय के भंडारण या परिवहन के लिए तरबूज को 7.2°C तापमान पर रखा जाना चाहिए। हालांकि, लंबे समय के लिए जैसे 14 दिनों तक के लिए , उन्हें 15°C पर रखा जाना चाहिए। इन फलों का इस्तेमाल तुरंत करना चाहिए वरना समय के साथ इनकी गुणवत्ता कम होती जाती है। इतना ही नहीं तरबूज को कभी भी सेब और केले के साथ नहीं रखना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि यह फल एथिलीन छोड़ते हैं जो तरबूज का स्वाद खराब कर सकता है। तरबूज को सूखी घास पर रखकर उन्हें ट्रक में डालकर उनका परिवहन किया जाता है।

तरबूज की अलग-अलग किस्मों (watermelon varieties) को उगाना अन्य फलों की तुलना में ज्यादा फायदेमंद होता है। यदि आप तरबूज के लेटेस्ट मंडी रेट (watermelon mandi bhav) पर एक नज़र रखना चाहते हैं, तो आप बीजक ऐप के मंडी रेट फीचर को देख सकते हैं। बीजक भारत का सबसे भरोसेमंद एग्रीट्रेडिंग ऐप है जो किसानों, खरीदारों (कमीशन एजेंटों) और सप्लायर को एक साथ लाता है। इस प्लेटफॉर्म पर हर दिन 150 से अधिक उत्पाद में व्यापार होता है। अगर आप एक कृषि व्यापारी हैं, तो आप Google Playstore और Apple App Store से बीजक ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। आप हमें 8588998844 पर भी कॉल कर सकते हैं या हमें contact@bijak.in पर ईमेल कर सकते हैं।

हमें उम्मीद है कि इस ब्लॉग ने आपको अपने पसंदीदा गर्मियों के फल – तरबूज के बारे में आवश्यक सभी जानकारी दी है। हम आपके विचार जानने के लिए उत्सुक हैं – कृपया नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार साझा करें। हर हफ्ते ऐसे ही बेहतरीन और ज्ञानपूर्वक ब्लॉग के लिए बीजक ब्लॉग को लाइक, शेयर और फॉलो करें।